(2) त्रेता युग



(2) त्रेता युग



काल मर्यादा :- सोलाह लक्ष (16 लाख) वर्ष, [16,00,000 वर्ष]

धर्म का आचरण :-

भक्ति करना,

अधर्म का आचरण :-

याग (यज्ञ) करना,

धर्म के आचरण का फल :-

सत्य-कैलास-वैकुंठ प्राप्ति फल,

अधर्म के आचरण का फल :-

द्वापार युग मेँ जन्म,

आयुष्य मर्यादा :- दस सहस्र (10 हजार) वर्ष, [10,000 वर्ष]

परमेश्वर अवतार :-

चतुर्युगी अवतार श्रीदत्तात्रेय विद्यमान,

देवता अवतार :-

(1) नृरसिंह अवतार :- क्षिराब्धीवासी महाविष्णूजी के आज्ञा से कर्मभुमी के 'यक्षणी' नामक देवताने लिया, और हिरण्यकश्यपु का वध करके भक्त प्रल्हाद का रक्षण किया।

(2) राम अवतार :- अष्टभैरव मेँ से महद् विष्णुजी ने लिया और रावण का वध करके बिभीषण को राज्य दिया।

(3) लक्ष्मण :- 'शेष' देवता का अवतार,

(4) हनुमान :- ग्याराह रुद्रोँ मेँ से 'ईशान रुद्र' का अवतार,

(5) भक्त प्रल्हाद :- महाविष्णुजी का सेवक विश्वभर का अवतार,

(6) बिभिषण :- पिछले जन्म का प्रल्हाद है,

(7) परशुराम अवतार विद्यमान,

आगे...... द्वापार युग ...