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एक राक्षस से भागने वाले शिवजी "सर्वशक्तिमान परमेश्वर" कैसे हो सकते हैँ...?





भस्मासुर से जान बचा ने के लिये भागेँ शिवशंकर...





आप सब जानते हीँ होँगे की शिवजी ने वृकासुर (भस्मासुर) को वर दिया की "तुम जिनके सर पर हाथ रखो वो जल कर भस्म हो जाय" ...

तो वृकासुर ने ये प्रयोग शिवजी के साथ करने की ठानी और शिवजी के पिछे उनके सिर पर हाथ रखने के लिये भाग उठा...

"अब तो शिव अपने दिये हुए वरदानसे भयभीत होँ गये ॥23॥

वह शिव का पिछा करने लगा

और शिव उससे डरकर काँपते हुये भागने लगे । वे पृथ्वी, स्वर्ग और दिशाऔँके अन्ततक दौड़ते गये; परन्तु फिर भी उसे पीछा करते देखकर उत्तरकी ओर बढे ॥24॥

बड़े बड़े देवता इस सकंटको टालनेका कोई उपाय न देखकर चुप रह गये। अन्तमेँ शिव वैँकुठलोक मेँ गये ॥25॥


[श्रीमदभागवत कथा महापुराण - दशम स्कन्द उत्तरार्थ, अध्याय 88, श्लोक 23 से 25]



तो अगर आप के पास Sence हो तो ही विचार कीजिये की...

एक राक्षस से भयभीत होकर शिव डरकर कापते हैँ और विष्णुजी से मदत मागते हैँ...

परंतु शिव भक्त इसे भी शिव की लिला कहते हैँ किन्तु शिव को ऐसी लिला करने का क्या प्रयोजन...? तथा डर कर भागने वाली लिला करना पहली बार देखी जा सकता हैँ, शिव भक्त इसकी तुलना भगवान श्रीकृष्णके कालियावन से भागने वाली लिला सेँ करते हैँ किन्तु भगवान श्रीकृष्ण ने शक्ति से नहीँ युक्ति का परिचय दिया यहाँ कहीँ पर भी डर कर भागने वाली बात नहीँ हैँ... परंतु शिव भक्त मानते ही नहीँ...





और इधर भगवान श्रीकृष्ण कहते हैँ...

मृत्युः सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च­ भविष्यताम्‌ ।


हे अर्जुन !मैं सबका नाश करने वाला मृत्यु और उत्पन्न होने वालों का उत्पत्ति हेतु हूँ ॥गिता 10-34॥



यच्चापि सर्वभूतानां बीजं तदहमर्जुन । न तदस्ति विना यत्स्यान्मया भूतं चराचरम्‌ ॥


और हे अर्जुन! जो सब भूतों की उत्पत्ति का कारण है, वह भी मैं ही हूँ, क्योंकि ऐसा चर और अचर कोई भी भूत नहीं है, जो मुझसे रहित हो ॥गिता 10-39॥



विष्टभ्याहमिदं कृत्स्नमेकांशेन स्थितो जगत्‌ ॥


मैं इस संपूर्ण जगत्‌ को अपनी योगशक्ति के एक अंश मात्र से धारण करके स्थित हूँ ॥गिता 10-42॥





तो एक तरफ शिवजी का अपने भस्म हो जाने के डर से काँप कर डरकर भाग जाना..

और दुसरी तरफ भगवान श्रीकृष्ण का कहना की "मैं सबका नाश करने वाला मृत्यु और उत्पन्न होने वालों का उत्पत्ति हेतु हूँ"

दोने के कथनी और करनी मेँ कितना फरक हैँ...


तो जरा सोचिये की एक राक्षस के भय से भागने वाले शिवजी "सर्वशक्तिमान परमेश्वर" कैसे हो सकते हैँ...







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