॥ भगवान श्री दत्तात्रेय प्रभु ॥

भगवान श्रीदत्तात्रेय प्रभु

भगवान श्रीदत्तात्रेय त्रेता युग में बद्रिकाश्रम निवासी महर्षि अत्रि और माता अनुसूया के पुत्र रूप में अवतरित हुए, उनका जन्म नाम सैंग ऋषि था। ऋषि दुर्वासा तथा सोम उनके बड़े भाई थे। भगवान श्रीदत्तात्रेय चतुर्युगी अवतार हैं अर्थात वह चारों युगों में विद्यमान हैं। इनका दर्शन अमोघ है, अर्थात उनका दर्शन निष्फल नहीं जाता। भगवान श्रीदत्तात्रेय आज भी प्रतिदिन बद्रिकाश्रम में पुराण सुनते हैं, काशीपुरी में स्नान, कोल्हापुर में भिक्षा, पंचालेश्वर में भोजन तथा माहुरगढ़ में निद्रा करते हैं। भगवान श्रीदत्तात्रेय को अवधूत भी कहा जाता है। जो भगवान श्रीदत्तात्रेय की शरण में जाता है भगवान उसकी रक्षा करते हैं और वह ईश्वर का कैवल्य प्राप्त करता है। जय कृष्णी/महानुभाव पंथ के अनुयायी, श्रीचक्रधर स्वामी के '' श्री दत्तात्रेय प्रभुचा चतुर्युगी अवतारु" (सू. वि. 22) अर्थ: ( श्रीदत्तात्रेय प्रभु का चारों युगों में रहने वाला अवतार है) इस वचन से श्रीदत्तात्रेय प्रभु कृत , त्रेत , द्वापार कली इन चारों युगों में सदैव रहने वाला ईश्वरीय अवतार मानते हैं । श्रीधर ने 'राम विजय (अ.11) में वर्णन किया है कि श्रीदत्तात्रेय प्रभु का अवतार समाप्त कल्पान्त में भी नहीं होगा:— (अन्य) अवतार उदंड है जो शीघ्र ही वापस लौट जाते हैं, वैसी श्रीदत्तात्रेय प्रभु की मूर्ति नहीं है क्योंकि उनका अवतार समाप्त कल्पान्त में भी नहीँ होता ।। 20।। पूर्ण परब्रह्रा से श्रीदत्तात्रेय प्रभु अवतार हुए जिनके दर्शनमात्र से अनेक जीवों का उद्धार हो गया है ।। 21 ।। जो प्रतिदिन प्रात:काल प्रयाग में स्नान करते हैं, पंचालेश्वर में अनुष्ठान करते हैं, जो कोल्हापुर में दोपहर के समय भिक्षा मांगते हैं, सूर्यास्त के समय जो वापिस सहाद्री पर्वत पर लौट जाते हैं तथा जिनका रास्ता पहले ही सब देवता हाथ जोड़कर देखते हैं, वह श्रीदत्तात्रेय प्रभु हैँ। __________________________________________________________

भगवान श्रीदत्तात्रेय प्रभु की लिलायेँ

भगवान श्री दत्तात्रेय परमेश्वर अवतार हैं, फिर भी उन्हेँ क्योँ ब्रम्हा - विष्णू - महेश का अवतार माना जाता हैँ ? जानिये...