॥ भगवान श्रीकृष्ण चक्रवर्ति ॥

॥ भगवान श्रीकृष्ण चक्रवर्ति ॥

जैसे बिजली मेघमण्डल को छोड़कर जब आकाश मेँ प्रवेश करती हैँ, तब मनुष्य उसकी चाल नहीँ देख पाते, वैसे ही बड़े - बड़े देवता भी श्रीकृष्ण के गतीके सबंध मेँ कुछ नहीँ जान सके । और भगवान ने जब "परमधाम" को प्रस्थान कीया तो सब देखते रह गयेँ ।

[श्रीमदभागवत्, स्कन्द 11, अध्याय 31 ]

श्रीकृष्ण देह विसर्जन स्थान : - हिरा नदी के कीनारे, प्रभास तिर्थ, वेरावल गुजरात राज्य, इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण ने अपना देह त्याग कर "परमधाम" को प्रस्थान किया था, और जिस प्रकार कपुर जलता हैँ और अपने पीछे कोई राख नही छोडता उसी प्रकार ये देह भी अपने आप पंचतत्व मे विलीन हो गया । (कर्पूरकज्जलिकावत् श्रीकृष्णचक्रवती पुरत्यागू केला-विचार 93)

इसी जगह पारधी (भिल्ल) ने बान मारा था, इसिलिये इस जगह को "भालका तिर्थ" कहा जाता हैँ ।