॥ भगवान श्रीकृष्ण चक्रवर्ति ॥

॥ भगवान श्रीकृष्ण चक्रवर्ति ॥

आदौं देवकी देव गर्भ जननं,

गोपी गृह वर्धनम, माया श्वान जीव ताप हरणं,

गोवार्धनो धारणं ॥ कंस छेदन कौरावादी हननं,

कुंती सुतम पालनं, एतद श्रीमद भागवत कथितं,

श्री कृष्ण लीला अमृतं ॥

जय कृष्णी पांच ईश्वरीय अवतारों को अपना ईष्ट मानते हैं। भगवान श्रीकृष्ण पूर्ण परब्रह्रा परमेश्वर के अवतार हैं, द्वापार युग के अतिँम चरण में निगुर्ण निराकार ईश्वर स्वरूप ने पिता वासुदेव और माता-देवकी के यहां मथुरा नगरी में स्थित कंस के कारागृह में माता के गर्भ से धारण कर अवतार धारण किया।

Shri Krishna Janm Bhumi, Mathura...

अपनी लीलाओं से अत्यचारी राक्षसों का वध कर अन्त में दुराचारी कंस का संहार किया।

Kans Quila, Mathura...

बारह वर्ष की बाल्यावस्था में भगवान श्रीकृष्ण ने विश्राम घाट (मथुरा) पर बैठकर अपने अव्यक्त स्वरूप से ज्ञान शक्ति स्विकार की।

Vishram Ghat, Mathura...

उन्होंने भक्त उद्ववदेव,माता कुन्ति और रुख्मिणी को प्रेम शक्ति दान दिया और कुब्जा का उद्धार किया। भगवान श्रीकृष्ण लिलाधर अवतार हैं अपने बाल्यकाल में उन्होंने अनेक अदभुत लीलाएँ कर जीवों का कल्याण किया। महाभारत के पूर्व कुरुक्षेत्र में अपने प्रिय सखा अर्जुन को ईश्वरीय गिता ज्ञान दिया। अन्त में प्रभु ने द्वारका पर राज्य कर अपना अवतार कार्य समाप्त किया।

Dwarkadeesh Temple, Dwarka...

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भगवान श्रीकृष्ण ने अपने देह को त्याग करके "परमधाम" को प्रस्थान किया... आगे जानने के लिये यहां किल्क करे...