(1) कृत युग



(1) कृत युग



काल मर्यादा :- बत्त्तीस लक्ष (32 लाख) वर्ष, [32,00,000 वर्ष]

धर्म का आचरण :-

आत्मा की उपासना करना,

अधर्म का आचरण :-

भक्ति करना,

धर्म के आचरण का फल :-

चैतन्य प्राप्ति फल,

अधर्म के आचरण का फल :-

त्रेता युग मेँ जन्म,

आयुष्य मर्यादा :- 1 लक्ष (लाख) वर्ष, [1,00,000 वर्ष]

परमेश्वर अवतार :- श्रीहंस अवतार

और

श्रीदत्तात्रेय अवतार ,

देवता अवतार :-

(1) मत्स्य अवतार :- वैकुंठवासी विष्णू के सेवक 'वज्रनाभ' नामक देवता ने लिया और शंखरासुर का वध किया।

(2) कच्छ अवतार :- क्षिराब्धी के महाविष्णूजी ने लिया और अमृतमंथन के वक्त मदरांचल पर्वत पिठ पर धर लिया।

(3) वराह अवतार :- वैकुठवासी विष्णूजी ने लिया और हिराण्याक्षक का वध करके पृथ्वी स्वस्थान पर रख दी।

(4) परशुराम अवतार :- महाविष्णू की आज्ञा से कैलासवासी महादेव ने लिया, और 21 बार पृथ्वी निक्षत्रिय कर डाली।

आगे...... त्रेता युग ...