(4) कलि युग



(4) कलि युग



काल मर्यादा :- चार लक्ष (4 लाख) वर्ष, [4,00,000 वर्ष]

धर्म का आचरण :-

तिर्थ, क्षेत्र, व्रत, दान,

अधर्म का आचरण :-

किसी भी प्राणी को मन, वाणी या शरिर से कष्ट देना अर्थात हिँसा,

धर्म के आचरण का फल :-

अंतराल प्राप्ति फल,

अधर्म के आचरण का फल :-

नरक

योनी मेँ जन्म,

आयुष्य मर्यादा :- एक शत (100) वर्ष, [100 वर्ष]

परमेश्वर अवतार :-

चतुर्युगी अवतार श्रीदत्तात्रेय विद्यमान,

श्रीचक्रपाणी प्रभु,

श्रीगोविँद प्रभु,

श्रीचक्रधर स्वामी विद्यमान,

देवता अवतार :-

(1) बौध्द अवतार :- सत्यलोक के ब्रम्हदेव ने लिया और यज्ञयागोँ मेँ सेँ प्राणी हिंसा चुकाणे के लिये बौध्द धर्भ की स्थापना करके अहिंसा मार्ग दिखाया।

(2) कलंकी अवतार :-आने वाले वक्त मेँ ब्रम्हदेव लेंगे 'हिंसा' ये अर्धम बहोत बढेगा, उसे मोडकर स्वर्धम स्थापन करेंगेँ।

(3) हनुमान अवतार विद्यमान,

(4) परशुराम अवतार विद्यमान,

कैसे होता है स्वर्ग......जानिये यहां किल्क करके... ...

कैसे होता है नरक......जानिये यहां किल्क करके... ...