बलात्कार

बलात्कार एक गलत सोच - गिता कोई कहता हैँ बलात्कार लडकीयोँ के कम कपडे पहनने से होते हैँ. कोई कहता लडकीयोँ के जिंस, और स्कर्ट पहनने से होता हैँ. तो कोई कहता लडकीयोँको बाहार घुमने फिरने से होता हैँ. राजनेता तो महीला सुरक्षा के वादे पुरे नहीँ कर पाते तो भी लडकी दोषी होती हैँ. धर्म गुरु तो लडकीयोँ को मर्यादा मेँ रहना सिखाते हैँ. तो आरोँपीयोँ के वकील लडकीओँ को ही दोषी करार देते हुयेँ दलिले देते हैँ. परंतु कोई भगवान के शब्दो पर गौर नहीँ करता. मुझे तो आश्चर्य होता हैँ की धर्म गरु भी भगवान श्रीकृष्ण के बातो को नहीँ समझे पायेँ ! भगवान श्री कृष्णने गिता मेँ बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के बारे मेँ प्रत्यक्षरुप से वर्णन नहीँ किया हैँ परंतु समझनेवालेको ईशारा काफी होता हैँ । ध्यायतो विषयान्पुंसः संगस्तेषूपजायते । संगात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते ॥ क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः । स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति ॥ {गिता अ. 2, श्लोक 62 और 63 } अर्थात, हे अर्जुन ! विषयों का चिन्तन करने वाले पुरुष की उन विषयों में आसक्ति हो जाती है, आसक्ति से उन विषयों की वासना उत्पन्न होती है और वासना में विघ्न पड़ने से क्रोध उत्पन्न होता है ॥62॥ क्रोध से अविवेक अर्थात भ्रान्ति निर्माण होती हैँ, भ्रान्ति से स्मृति में भ्रम हो जाता है, स्मृति में भ्रम हो जाने से निश्चयात्मक बुद्धि अर्थात ज्ञानशक्ति का नाश हो जाता है और बुद्धि का नाश हो जाने से यह पुरुष अपनी स्थिति से गिर जाता है अर्थात उसका पुर्णता पतन हो जाता हैँ ॥63॥ भगवान की बातो को समझे तो बलात्कार की प्रकिया मनसे शुरु होकार बुद्दी और इद्रीयोँ के तृप्तता पर जा कर खतम होती (1) विषयों का चिन्तन करने वाले पुरुष :- Mobile तथा TV पर Blue Flim, Hot Scenes, Nude Wallpapers देखना । (2) उन विषयों में आसक्ति हो जाती है :- आसक्ति याने बार बार उनको देखने की आदत पड जाना । (3) आसक्ति से उन विषयों की वासना उत्पन्न होती है :- आदत पड जाने से उन विषयोँ को अर्थात स्री भोग भोगने की वासना अर्थात इच्छा प्रबल जागृत होना । (4) वासना में विघ्न पड़ने से क्रोध उत्पन्न होता है :- किसी लडकी तथा Girl Friend के साथ सबंध बनाने पर मना करने के कारण वासना मेँ विघ्न पड़ने से क्रोध उत्पन्न होता है । (5) क्रोध से अविवेक अर्थात भ्रान्ति निर्माण होती हैँ :- अपुर्ण वासना से उत्पन्न हुये क्रोध से अविवेक अर्थात भ्रान्ति यानी सत्य-असत्य का ज्ञान नहीँ रहता । (6) भ्रान्ति से स्मृति में भ्रम हो जाता है :- वासना से क्रोध और क्रोध से अविवेक और अविवेक से स्मृति में भ्रम अर्थात स्मरणशक्ती का नाश हो जाता है और वह पुरुष यह भुल जाता हैँ बलात्कार जघन्य अपराधों है। जिसकी सजा उम्रकैद अथवा मौत तक हो सकती है। (7) स्मृति में भ्रम हो जाने से निश्चयात्मक बुद्धि अर्थात ज्ञानशक्ति का नाश हो जाता है :- स्मरणशक्ती ना होने से मनुष्य विचार करने निश्चयात्मक शक्ति अर्थात ज्ञानशक्ती खो देता है और वासना तृप्ती के लिये प्रयत्न करने लगता हैँ । (8) बुद्धि का नाश हो जाने से यह पुरुष अपनी स्थिति से गिर जाता है अर्थात उसका पुर्णता पतन हो जाता हैँ :- अर्थात जब बुद्धि का नाश होता हैँ तो वह वासना तृप्ति के लिये बलात्कार जैसे अपराध कर बैठता हैँ तथा लडकी को जिँदा जलाने जैसे जघन्य अपराध से उसका ही पतन होता हैँ । यह प्रक्रीया मन से शुरु होती है इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोऽनुविधीयते । तदस्य हरति प्रज्ञां वायुर्नावमिवाम्भसि ॥ {गिता 2-67 } क्योंकि जैसे जल में चलने वाली नाव को वायु हर लेती है, वैसे ही विषयों में विचरती हुई इन्द्रियों में से मन जिस इन्द्रिय के साथ रहता है, वह एक ही प्रमथन स्वभाववाली इन्द्रिय इस अयुक्त पुरुष की बुद्धि को हर लेती है॥67॥ जब वह एक ही प्रमथन स्वभाववाली इन्द्रिय इस अयुक्त पुरुष की बुद्धि को हर लेती है तब वह पुरष आगे पिछे न सोच कर कुकर्म कर बैठता हैँ । हम कहते ज्ञानी और बुद्दिमान पुरष ये अपराध कैसे कर सकते हैँ, यततो ह्यपि कौन्तेय पुरुषस्य विपश्चितः । इन्द्रियाणि प्रमाथीनि हरन्ति प्रसभं मनः ॥ {गिता 2-60 } हे अर्जुन! आसक्ति का नाश न होने के कारण ये प्रमथन स्वभाव वाली इन्द्रियाँ यत्न करते हुए बुद्धिमान पुरुष के मन को भी बलात् हर लेती हैं ॥60॥ जब ये प्रमथन स्वभाव वाली इन्द्रियाँ बुद्धिमान पुरुष के मन को भी बलात् हर लेती हैं अर्थात पहले बलात्कारी के मन और बुध्दि पर ये इद्रियाँ बलात्कार करती हैँ [इन्द्रियाँ, मन और बुद्धि- ये सब इसके वासस्थान कहे जाते हैं। यह काम (sex) इन मन, बुद्धि और इन्द्रियों द्वारा ही ज्ञान को आच्छादित करके जीवात्मा को मोहित करता है। ॥Geeta 3-40॥ ] और ये सब होता हैँ गलत सोच से... जब बलात्कार होता है तो सडको पर मार्च निकाला जाता हैँ, We Want Justice जैसे नारे चलते हैँ पर... क्या फायदा जब कोई नयी फिल्म आती हैँ तो बिना Hot Bold Scences वाली फिल्म Floph करार दि जाती हैँ । कोई भी Director अपनी फिल्म मेँ Hotness चाहता हैँ, क्यो की लोगो की खराब मानसिकता को यही पसंद हैँ । पहले जमाने मेँ छोटे बच्चो को Blue Flim देखने को नहीँ मिलती थी, और आज कल तो पाँचवी का बच्चा भी 20 रुपये वाला Net Pack डालकर सैकडो MMS देखता हैँ. और लडकीओँ के Privete Parts को हमेशा घुरता रहता हैँ । जिन्हे सचमुच बलात्कार मुक्त भारत चाहीये वह लोग क्यो नहीँ Porn Nude Internet का बहिश्कार करते, क्यो ऐसी फिल्मे और B,C Grede फिल्मो का बहिश्कार नहीँ करतेँ ? कोइ भी अपने Girl Friend का MMS बनाकर Web Site पर डालता है, तो कोई Facebook Page पर Nude Girls की तस्विरे डालकर भद्धी Comment करता हैँ । क्यो कोई सरकार या न्याय व्यवस्था इन सब पर भारत मेँ Ban नहीँ करता ? जागिये, और बहिश्कार किजिये इन Porn, Nude और Hot Bollywood तथा Porn Nude Internet का । सोच बदलो देश बदलेगा, अकेले नरेद्र मोदी क्या करेँगेँ ।

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26 Oct 2015