...जब ब्रह्माजी ग्वाल बालो को अपने साथ सत्यलोक ले गये ।



* प्रमाण आठवा *


हिन्दु धर्म के अनुसार कहा जाता है की श्री ब्रम्हा विष्णु और महेश यहीँ तिनोँ देव अवतार लेते है और इन तिनोँ के अवतार कार्यो के बारेँ मे इन सब को पता रहता है । पर ये बात उस वक्त की है, जब भगवान श्रीकृष्णजी छोटे थे और ग्वाल बालो के साथ गाय चराने वनोँ मेँ जाते थे। तब ब्रम्हाजी को कौन बालक गोकुल मेँ चमत्कार करता है इसिलीये परीक्षा लेने के इरादे से उन्होने सभी गाय बछडे के साथ सभी ग्वालो को अपने साथ सत्यलोक ले गये। जब वो उन सबको रखकर वापस आये तो धरती के समय के अनुसार (Time Therapy) धरती पर पुरा एक साल बित चुका था। फिर ब्रम्हाजी ने देखा की जो गाय बछडे और ग्वाल ओ ले गये थे बिलकुल वैसेही थे और भगवान श्रीकृष्णजी के साथ खेल रहे है ये चमत्कार देखकर वो हक्केबक्के रह गये फिर ब्रम्हाजी ने अर्तदृष्टी से सत्यलोक की तरफ झांक कर देखा तो वहाँ भी सभी गाय बछडे और ग्वाल वहीँ थे। उसते बाद ब्रम्हाजी हारकर भगवान को शरण गये और क्षमा मांगी।

{श्रीमद्भागवत कथासार, दशम स्कन्द (पुरर्वाध) अध्याय 13 और 14}

इससे यहीँ प्रतित होता है की अगर भगवान श्रीकृष्णजी विष्णुजी का अवतार होते तो ब्रम्हाजी को परीक्षा लेने की और क्षमा मांगने की क्या आवशक्यता थी ? लेकिन सत्य तो यहीँ है की ब्रम्हा - विष्ण - महेश ये सभी देव सृष्टी का व्यापार करने के लिये सज्ज है । ये सब भगवान श्रीकृष्ण की बराबरी नहीँ कर सकते ।

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