शिरडी साई : कथाकथित भगवान, संत, फकिर या करोडपती

“बाबा का शरीर अब वहीँ विश्रांति पा रहा है” — स्पष्ट है इसे दफन ही किया गया ! जहाँ उसे दफ़न किया गया वो मंदिर था किस का ?

भगवान श्री कृष्ण का ! बुधवार संध्या को बाबा का पवित्र शरीर बड़ी धूमधाम से लाया गया और विधिपूर्वक उस स्थान पर समाधी बना दी गई ! सच तो ये है की बाबा ‘मुरलीधर’ बन गये और समाधी मंदिर एक पवित्र देव स्थान ! {अध्याय ४३ }

श्री कृष्ण के मंदिर में इस सड़ी लाश को गाडा गया !! और पूज दिया गया ! कई साईं भक्तों का ये भी कहना है की बाबा ने कभी भी स्वयं को भगवान नही कहा, तो आईये उनके मतिभ्रम का भी समाधान करते है :-

निम्न प्रति साईं सत्चरित्र अध्याय 3 की है :-

इस पुस्तक में और भी पचासों जगह बाबा ने स्वयं को ईश्वर कहा है ! हम केवल यह एक ही उदहारण दे रहे है !

ये हाल है दोस्तों :– करोडो भारतियों की आस्था के साथ बलात्कार किया गया है एक बार नही बारम्बार !!! जिन्हें ईश्वर ने जरा सी भी बुद्धि दी है वो तो उपरोक्त वर्णन से ही समझ चुके होंगे ! शिर्डी वाले का भांडा फूटते ही —->

सत्य साईं का अपने आप ही फुट गया क्यू की सत्य साईं उसी का अवतार था !

—->दोस्तों साईं और सत्य साईं की पोल पूरी खुल ही चुकी है परन्तु हमारे करोडो भाई-बहिनों-माताओं आदि के ह्रदय में इनका जहर घोला गया वो उतरना अति अति आवश्यक है ! इसलिए आगे बढ़ते है और अभी भी मात्र लोगोको सत्य दिखने के लिए इसे(शिर्डी वाले को) चमत्कारी ही मान कर चलते है ! —————————————————————

–साईं बाबा का जीवन काल 1838 से 1918 (80 वर्ष) तक था (अध्याय 10 ) , उनके जीवन काल के मध्य हुई घटनाये जो मन में शंकाएं पैदा करती हैं की क्या वो सच में भगवान थे , क्या वो सच में लोगो का दुःख दूर कर सकते है?

जय श्री कृष्ण...