जब श्रीराम ने पुछा मोक्ष के बारे मेँ।



प्रमाण छठवा *


जब श्रीराम गुरुकुल मे पढने जाते थे तब एक दिन उन्होने गुरू वशिष्ठ को मोक्ष के बारे मे पुछा और वशिष्ठ ने उन्हे समझाया । पर गिता मे भगवान श्रीकृष्णजी ने कहा है की,

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज । अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः ॥

गिता अध्याय 18, श्लोक 66. Geeta Link

अर्थात हे अर्जुन! सभी धर्मों का सर्वसंग परीत्याग करके तू केवल एक मुझ सर्वशक्तिमान, सर्वाधार परमेश्वर की ही शरण में आ जा। मैं तुझे संपूर्ण पापों से मुक्त कर के मोक्ष दुँगा, तू शोक मत कर ॥॥

एक तरफ भगवान श्रीकृष्णजी है जो मोक्ष देने की बात करते है और दुसरी ओर श्रीराम है जो मोक्ष के बारे पुछते है, तो आप ही बताईये की ये दोनोँ अवतार एक कैसे हो सकते है? फिलहाल आप चलते रहीये आगे.........

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