...रावणद्वारा सिता हरण होने पर श्रीराम और श्रीलक्ष्मण सुग्रिव के साहयता से सीता को ला पाये ।



* प्रमाण पाचवा *


वाल्मिकी रामायण - राक्षसा प्रहृता भार्या रहिते कामरूपिणा । तच्च न ज्ञायते रक्ष पत्नि ये नास्य वाहृता ॥8॥ एनत्त सर्वमाख्यातम् याथातत्थेन पृष्छत:। अहं चैव च रामश्च सुग्रिवं शरणं गतै ॥9॥ तस्याहं पूर्वज: पुत्र: स्त्राषु लोकेषु विश्ररुत:। सुग्रिवं वानरेन्द्रतु: राम: शरणमागत: ॥14॥ कि. कां. सं. 4, श्लोक 8-9-14.

इस श्लोक के अनुसान, रावणद्वारा सिता हरण होने पर श्रीराम और लक्ष्मण सुग्रिव के साहयता से सीता को ला पाये, श्रीराम ने अपने आपको कमकुवत और निर्बल समझा और वानर राज सुग्रिव को शरण गये। लेकिन,

भगवान श्रीकृष्ण का कहना है की मै सर्वशक्तिमान हुँ, मुझे किसी की साहयता की आवश्यकता नहीँ हैँ। इसके संर्दभ मेँ उन्होँने गिता मेँ कहा हैँ की,

एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय । अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा ॥ गिता अध्याय 7, श्लोक 6. Geeta Link

अर्थात हे अर्जुन, ! तू ऐसा समझ कि सम्पूर्ण भूत इन दोनों प्रकृतियों से ही उत्पन्न होने वाले हैं और मैं सम्पूर्ण जगत का प्रभव तथा प्रलय हूँ अर्थात्‌ सम्पूर्ण जगत का मूल कारण हूँ॥॥


मत्तः परतरं नान्यत्किञ्चिदस्ति धनञ्जय ।


[गिता 7-7]


अर्थात... हे धनज्जय ! मुझसे भिन्न दुसरा कोई भी परम कारण नहीँ हैँ...


6 वा प्रमाण अगले पेज पर...अगला पेज

Back Page

पेज :- 3 4 [5] 6 7