...हनुमानजी द्वारा हिमालय से संजीवनी बुटी लानी पडीँ तब जाकर लक्ष्मणजी आंख खोल पाये ।



* प्रमाण चौथा *


भगवान श्रीकृष्ण ने रूख्मिणी का हरण किया था तब कुछ सैनिक मुर्छित हो गये थे पर भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कृपादृष्टी से उन्हे पुर्नजिवीत कर दिया, {श्रीमद्भागवत कथासार दशम स्कन्द (उत्तरार्ध) अध्याय 53 और 54}

पर ऐसा श्रीराम नहीँ करते उन्हे हनुमानजी द्वारा हिमालय से संजीवनी बुटी लानी पडीँ तब जाकर लक्ष्मणजी आंख खोल पाये, इन दोनोँ अवतारो के प्रसंग से ये पता चलता है की श्रीकृष्ण सर्वशक्तीमान परमेशर के अवतार हैँ, जब की श्रीराम तो विष्णुजी के अवतार हैँ।

गतिर्भर्ता प्रभुः साक्षी निवासः शरणं सुहृत्‌ । प्रभवः प्रलयः स्थानं निधानं बीजमव्ययम्‌॥ गिता अध्याय 9, श्लोक 18. Geeta Link

: अर्थात हे अर्जुन, होने योग्य परम धाम, भरण-पोषण करने वाला, सबका स्वामी, शुभाशुभ का देखने वाला, सबका वासस्थान, शरण लेने योग्य, प्रत्युपकार न चाहकर हित करने वाला, सबकी उत्पत्ति-प्रलय का हेतु, स्थिति का आधार, निधान (प्रलयकाल में संपूर्ण भूत सूक्ष्म रूप से जिसमें लय होते हैं उसका नाम 'निधान' है) और अविनाशी कारण भी मैं ही हूँ॥

एक तरफ भगवान श्रीकृष्णजी का कहना की मै पोषन कर्ता, उत्पादक, संहारक, हितचिंतक, रक्षक, साक्षी, आश्रयस्थान, निधान, अविनाशी, मुलकारण, मोक्षदाता परमेश्वर हुँ। बल्की श्रीराम को शोक करते संजीवनी बुटी का सहारा लेते हुये देखा जा सकता है ।

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