33

 

(1) महानुभाव पंथ ने महाराष्ट्र को समृध्द बनाया - पुर्व राष्ट्रपती प्रतिभा देवी सिँह पाटिल, 28 जुन. 2009, महा. विधानसभा मुंबई।

http://images.staticjw.com/jay/6797/image0001.jpg  

 

(2) महानुभाव पंथ के प्राचिन लिपी भाषा के ग्रंथ को देखकर आश्चर्य चकित हुँ - वर्तमान प्रधानमंत्री और तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेद्र मोदी, गुजरात 2010 ।

(3)

श्री चक्रधर स्वामी का उपदेश केवल महानुभावों के लिए नहीं, वरन सम्पूर्ण मानवता के लिए, 

मे अफसोस इस बात का हैँ की महानुभाव पंथ हमेँ पहले क्योँ नहीँ मिला - मोहन भागवत, सरसंघचालक (RRS प्रमुख)

 

(4) महानुभाव धर्म मानवता का मूर्तीमंत उदाहरण हैँ, मेरे मन मेँ इस धर्म ने स्थान निर्माण किया हैँ - डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर

(5) भगवान श्रीकृष्ण के धर्म का मार्ग महानुभाव पंथ ने पुरापुरा आचरण मेँ लाया हैँ - विनोबा भावे

(6) "साधुसंतोँके वारकरी पंथ से भी महानुभाव पंथ की योग्यता कम नहीँ हैँ, इतना ही नहीँ तो उन्ह से भी कुछ साल पुराना हैँ ये निर्विवाद सत्य हैँ, महानुभाव पंथ मानवता का साकार करने के लिये बोहोत उपयुक्त ऐसा पंथ हैँ" - बाल गंगाधर तिलक (केसरी, 19/11/1907)

(7) महानुभाव पंथ एक गिता तत्वानुयायी पंथ हैँ, यहां के तत्वज्ञान और पंथ का आचरण गिताधर्म पर अधार किया हुआ हैँ - लोकनायक बापुजी ।

(8) मै जिस जिस गांव में गया उस उस गांव मेँ महानुभाव पंथ के अनुयायी दिखे - आचार्य धर्माधिकारी

(9) मैँ महानुभाव पंथ का अभ्यास करना चाहता हुं, मुझे इस पंथ प्रती के बहोत अत्मियता निर्माण हो गयी हैँ - पुर्व राष्ट्रपती डॉ. राधाकृष्णन सर्वपल्ली।

(10) महानुभाव पंथ ने मेरे शैक्षणिक कार्योँ मेँ अनमोल सहकार्य किया हैँ - कर्मविर भाऊराव पाटील ।

(11) मैँ स्वयं को धन्य समजता हुं की भगवान श्रीचक्रधर और भगवान श्रीगोविँद प्रभु के चरण जिस भुमी मेँ लगेँ उसी भुमी मेँ आज मैँ घुम रहा हुं - डॉ. भाऊसाहेब देशमुख ।

(12) अशिक्षित समाज को भी महानुभाव पंथ ने आकृष्ट करके उनके मन मेँ दान, दया करणे की प्रवृत्ती निर्माण की हैँ - गो. नी. दांडेकर ।

(13) महानुभाव पंथ के साहित्य मेँ मुझे इतना प्रबल प्रभाव दिखा की, वो दुनिया मेँ कीसी पंथ मेँ नहीँ हैँ - ब्लादीमीर लाग्शुकोव, रशिया।

(14) समता का तत्वज्ञान बताने वाले भगवान श्रीचक्रधर स्वामी आद्य क्रांतिकारक हैँ - रा. सु. गवई, सभापती, वि. प.

(15) क्षीर (दुध) नीर (पाणी) निवडती । तया महानुभाव बोलीजेती ॥ - समर्थ रामदास ।

(16) माता पिता हो भगवान श्रीचक्रधर और गोविंदप्रभु का संदेश अपने जिवन मेँ कर लिजिये - संत गाडगेबाबा ।









कुछ प्रश्न और उनके समाधान