जानिये, "भगवान श्रीकृष्ण" ने कौन से युग मेँ कौन सा अवतार लिया है ?

आईये जानते "परमेश्वर" ने किस युग मेँ कौन सा अवतार लिया।

हम आपको जो अवतार बताने जा रहे हैँ वो परमेश्वर के अवतार हैँ जो भगवान श्रीकृष्ण के हैँ।

[1] श्रीहंस अवतार

"ऐसी विरिचीची करुणा । परिसोनी कैवल्यराणा॥ होवोनि हंसपक्षी जाणा। अवतार धर त्या समयी॥"

[ सिंधात बोध & श्रीमदभागवत कथासार एकादश स्कन्ध, अध्याय 13, श्लोक 18 से 31]

भगवान श्रीकृष्ण ने उध्दव को कहा की मैँने ही कृत युग मेँ हंस के रुप मेँ अवतार लेकर प्रजापति ब्रम्हा के मानस पुत्र सनाकादिक को ज्ञान दिया और उनका उद्दार किया, ये बात भगवान गिता के 3 रे अध्याय के 20 वे श्लोक मेँ भी कही हैँ।

[2] श्रीकृष्ण अवतार

"माया जाहली कृष्णतनु। आंत अभिमान तो श्रीकृष्णु। आत्मकळा जगजीवन्॥ बिंबवत् प्रकाशला ॥

[ सिधांत बोध & श्रीमदभागवत कथासार ]

द्वापार युग मेँ वसुदेव - देवकी के गोद से "श्रावण वद्य अष्टमी रात 12 बजे मथुरा (UP) मेँ जन्म लिया, और कंसवध, पांडव, उध्दव, सुदामा, विदुर जैसे भक्तो का उध्दार किया, गोपिका रुख्मिणी को प्रेमदान दिया, अर्जुन को दिव्य श्रीमद्भागवत् गिता शास्त्र बताकर अनंत जिवोँका उद्दार किया।

[3] श्रीदत्तात्रेय अवतार

दत्तात्रेय परमेश्वर। हेचि ओळखे साचार॥ जीवांचा करावया उध्दार। अवधुतवेषे प्रगटला॥ [ सिधांत बोध 28-33 ]

कृत युग के अतिँम और त्रेता युग आरंभ काल मेँ अत्री - अनुसुया के गोद से मार्गशिर्ष शुध्द चतुर्दशी प्रात: काल 4 बजे, ब्रदिकाश्रम, जिला गोपेश्वर, चामोली (उत्तराखंड) [हरिद्वार से लगभग 300 कि.मी.] मेँ जन्म लिया। यदुराज को "उध्दवगिता" बताकर, कल्याण मार्ग अर्थात महानुभाव पंथ तथा जयकिष्णी पंथ के आदिकारण बने।

[4] श्रीचक्रपाणी अवतार

कलि विचित्र वेषण दत्तं श्रीचक्रपाणिना ॥

[ तत्वसारोपनिषद् ]

कलि युग मेँ शके 1050 (इ.स. 1128) मेँ जनक - जनकाइसा की गोद मेँ आश्विन वद्य नवमी सुभह 9 बजे, फलटन, जिला सातारा (MH) मेँ जन्म लिया । द्वारावती, (गुजरात) मेँ प्रतिदिन 52 पुरुषो को विद्यादान देने का कार्य ।

[5] श्रीगोविंद अवतार विध्यांशैल समीप खेड विशद प्रांत पुरं रुध्दिपूर॥ नामास्य द्विज चिभ्दवेति बिबुधो भक्ती प्रदो मुक्तिद:॥

[ भविष्यपुराण ]

कलि युग मेँ शके 1109 (इ.स. 1187) मेँ अनंतनायक - नेमाईसा की गोद मे भाद्रपद शुध्द 13, रात 11 बजे काटसुर जिला अमरावती (MH) मेँ जन्म लिया। प्रतिदिन 60 जिवोँकी अविद्या छेदने का कार्य।

[6] श्री चक्रधर अवतार

कृती हंस त्रेती दत्त॥ द्वापारी कृष्ण समर्थ॥ कलिमाजी अनंत ॥ चक्रधर नाम माझे ॥

[ सिधांत बोध 30-61 ]

कलि युग मेँ शके 1143 (इ.स.1221) वृषभ संवस्तर, भाद्रपद शुध्द द्वितीया शुक्रवार 26-08-1221 इस दिन दोपहर 12 बजे श्रीचक्रपाणी अवतार ने कामाख्या को निमित्त करके अपने अवतार कार्य समाप्त करके हरिपाल के मृत देह मेँ परमेश्वर ने प्रवेश कीया। विशाल देव - मालनी ये हरिपाल के माता पिता थे। हरिपाल ने भरुच (गुजरात) मेँ जन्म लिया था, ओर 25 साल की उम्र मेँ उसी दिन हरिपाल की मृत्यू हो गयी थी। तब से चक्रपाणी चक्रधर कहलाये। तब से ब्रम्हविद्या बतालाना और जिवोँका उध्दार का कार्य आज भी चालु हैँ, यह अवतार आज भी विद्यमान हैँ ।



कुछ प्रश्न और उनके समाधान