अगर "श्रीविष्णु" और "श्रीकृष्ण" अलग अलग हैँ, तो भगवान ने गिता मेँ मैँ ही 'राम' या 'विष्णु' हुं ऐसा क्योँ कहा है ?



अगर विष्णु और श्रीकृष्ण अलग अलग हैँ, तो भगवान ने गिता मेँ मैँ ही 'राम' या 'विष्णु' हुं ऐसा क्योँ कहा है ? (भाग - 1)


भगवान श्रीकृष्णजी ने गिता के 10 अध्याय के 31 और 23 वेँ श्लोक मेँ कहां हैँ की,

राम: शस्त्रभृतामहम्‌।

अर्थात शस्त्रधारीओँ मेँ राम मैँ हुं।

तथा रुद्राणां शङ्करश्चास्मि

मैं एकादश रुद्रों में शंकर

लेकीन भगवान श्रीकृष्णजी का आशय लोग समझ नहीँ पाते और भ्रमित हो जाते हैँ।

भगवान ने श्रीराम के बारे मेँ अपने विभुतीयोँ का विस्तार करते हुये कहा, इसका मतलब ये नहीँ की श्रीकृष्ण और श्रीराम एक हैँ । जिस प्रकार इसी अध्याय मेँ भगवान आगे कहते हैँ।

उच्चैःश्रवसमश्वानां विद्धि माममृतोद्धवम्‌ । एरावतं गजेन्द्राणां नराणां च नराधिपम्‌ ॥

आयुधानामहं वज्रं धेनूनामस्मि कामधुक्‌ । प्रजनश्चास्मि कन्दर्पः सर्पाणामस्मि वासुकिः ॥

पवनः पवतामस्मि रामः शस्त्रभृतामहम्‌ । झषाणां मकरश्चास्मि स्रोतसामस्मि जाह्नवी ॥ गिता अध्याय 10, श्लोक 27... Geeta Link

अर्थात घोड़ों में अमृत के साथ उत्पन्न होने वाला उच्चैःश्रवा नामक घोड़ा, श्रेष्ठ हाथियों में ऐरावत नामक हाथी और मनुष्यों में राजा मुझको जान॥27॥

मैं शस्त्रों में वज्र और गौओं में कामधेनु हूँ। शास्त्रोक्त रीति से सन्तान की उत्पत्ति का हेतु कामदेव हूँ और सर्पों में सर्पराज वासुकि हूँ॥28॥

मैं पवित्र करने वालों में वायु और शस्त्रधारियों में श्रीराम हूँ तथा मछलियों में मगर हूँ और नदियों में श्री भागीरथी गंगाजी हूँ॥31॥

तथा पांडवो मेँ अर्जुन मैँ हुँ, अगर अर्जुन ही श्रीकृष्ण हैँ तो गिता बताने का सवाल ही पैदा नहीँ होता।

आगे बढने के लिये यहां किल्क करेँ...


कुछ प्रश्न और उनके समाधान