क्या "राधा"या "रुख्मिणी" की भक्ती करनेसे श्रीकृष्ण की प्राप्ति होगी ?

भगवान श्रीकृष्ण को राधा के बिना आधा,

या फिर राधा का प्रेमी बतलाया जाता,

भगवान श्रीकृष्ण उन लोग को मुर्ख कहते है ।

अवजानन्ति मां मूढा मानुषीं तनुमाश्रितम्‌। परं भावमजानन्तो मम भूतमहेश्वरम्‌ ॥

मेरे परमभाव को न जानने वाले मूढ़ लोग मनुष्य का शरीर धारण करने वाले मुझ संपूर्ण भूतों के महान्‌ ईश्वर को तुच्छ समझते हैं अर्थात्‌ अपनी योग माया से संसार के उद्धार के लिए मनुष्य रूप में विचरते हुए मुझ परमेश्वर को साधारण मनुष्य मानते हैं ॥Geeta 9-11॥

अव्यक्तं व्यक्तिमापन्नं मन्यन्ते मामबुद्धयः । परं भावमजानन्तो ममाव्ययमनुत्तमम्‌ ॥

बुद्धिहीन पुरुष मेरे अनुत्तम अविनाशी परम भाव को न जानते हुए मन-इन्द्रियों से परे मुझ सच्चिदानन्दघन परमात्मा को मनुष्य की भाँति जन्मकर व्यक्तिभाव को प्राप्त हुआ मानते हैं ॥Geeta 9-24॥

भक्त्या मामभिजानाति यावान्यश्चास्मि तत्त्वतः। ततो मां तत्त्वतो ज्ञात्वा विशते तदनन्तरम्‌॥

और जो भक्त पराभक्ति के द्वारा वह मुझ परमात्मा को, मैं जो हूँ और जितना हूँ, ठीक वैसा-कावैसा तत्त्व से जान लेता है तथा उस भक्ति से मुझको तत्त्व से जानकर तत्काल ही मुझमें प्रविष्ट हो जाता है ॥18-55॥

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कुछ प्रश्न और उनके समाधान

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