क्या "राधा" या "रुख्मिणी" की भक्ती करने से श्रीकृष्ण की प्राप्ति होगी ?

भगवान श्रीकृष्ण के जिवन से जुडे तिन ग्रंथ श्रीमद्‌भागवत गिता , श्रीमद्‌भागवत कथा महापुराण और महाभारत इन तिनोँ ग्रथोँ मेँ से किसी भी ग्रंथ के किसी भी पन्ने पर "राधा" यह नाम कही ढुंढने पर भी नहीँ मिलता.

अगर राधे राधे रटने से बिहारीलाल चले आते तो भगवान गिता मेँ ये क्यू कहते की

मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु । मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे ॥

गिता अध्याय 18, श्लोक 66. Geeta Link

अर्थात हे अर्जुन! तू मुझमें मन लगानेवाला हो, मेरा भक्त बन, मेरा पूजन करने वाला हो और मुझको प्रणाम कर। ऐसा करने से तू मुझे ही प्राप्त होगा, यह मैं तुझसे सत्य प्रतिज्ञा करता हूँ क्योंकि तू मेरा अत्यंत प्रिय है॥65॥

भगवान ने निश्चयात्मक स्वर मेँ कहा की मुझे ही भजता रह तो राधा को भजने से श्रीकृष्ण को कैसे पाया जा सकता हैँ।

वास्तव मेँ राधा एक ग्वालिन थी और भगवान से प्रेम करती ऐसी कहानीओँ मेँ सुनने को मिलता हैँ, बस इसका उल्लेख भागवत ग्रंथ मेँ कही पर नहीँ हैँ। राधा रुख्मिणी सत्यभामा की पुजा करके हम देवीदेवताओँका भी फल नहीँ भोग पायेँगेँ क्योँकीँ ये साधारण जिव हमेँ क्या दे सकते हैँ। उम्मीद हैँ आपको समझ आ गया हो, आगे आप समझदार हैँ।

भगवान श्रीकृष्ण को राधा का प्रेमी बतलाने वालो को भगवान श्रीकृष्ण मुर्ख कहते हैँ, जानिये... यहां किल्क करके...



कुछ प्रश्न और उनके समाधान

राधा का सच जानिये...