क्या "राधा" या "रुख्मिणी" की भक्ती करने से श्रीकृष्ण की प्राप्ति होगी ?





राधा और रुख्मिणी को देवी मानने की प्रथा आज से नहीँ बल्की बहोत पहले से हैँ। जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण श्रीविष्णुजी से दुरदुर तक कोई नाता नहीँ हैँ, ये हम आपको पहले हीँ प्रमाणो मेँ समझा चुके हैँ मगर रुख्मिणी को जो लोग देवी लक्ष्मी का रुप मानते हैँ ओ भी गलत हैँ। आज के महाराष्ट्र के अमरावती जिले के कौडण्यपुर की राजकन्या रुख्मिणी और राजकुमार रुख्मि, भगवान श्रीकृष्ण के बुआ का लडका शिशुपाल भगवान का द्वेष करता था और रुख्मि भी उसका मित्र था, इसिलिये उसने रुख्मिणी का विवाह शिशुपाल से तय कर दिया पर रुख्मिणी भगवान श्रीकृष्ण से अत्याधिक प्रेम करती थी, कारणवश भक्त को प्रेम दान देने के लिये रुख्मिणी हरण करना पडा। रुख्मिणी और सत्यभामा और अन्य पत्नीयां एक साधारण जीव थी। पर लोग और पण्डीतो ने पैसो के लालच के लिये रुख्मिणी और सत्यभामा तथा राधा और गोपीयोँ के भी मंदीर बना डालेँ ।

राधे राधे की जपले तु माला तोहे मिलेंगे गोपाला, और राधे राधे रटो चले आयेँगे बिहारीँइन जैसे गानोँ से लोग भ्रमित हो रहेँ हैँ।

पर राधा हैँ क्या, रुख्मिणी को आपने लक्ष्मी का रुप कह दिया , पर राधा क्या हैँ, ये जान कर आपके पैरो तले जमिन खिसक सकती हैँ की..........

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कुछ प्रश्न और उनके समाधान

राधा का सच जानिये...