*

"ब्रह्माविष्णुमहेश" अर्थात 'त्रिदेव' देवता हैँ परमेश्वर नहीँ... जानिये "शिवपुराण" का तथ्य ?





त्रिदेव स्वयं कबुल कर रहे हैँ... "हम देवता हैँ 'परमेश्वर' नहीँ हैँ।"...





सदियो से हिन्दु धर्मावलंबी लोग ब्रम्हा विष्णु महेश का पुजन करते आये है...

परंन्तु परब्रह्म परमेश्वर श्रीकृष्ण महाराज को इन तिनो देवोँ मे रखना उचित प्रतित नहीँ होता...

हिँदु धर्म के प्रमुख देव महादेव से नाम्मांकित शिव का चरित्र रहने वाले "शिवपुराण" मे स्वयं ब्रम्हा विष्णु महेश ये बात कबुल रहे हैँ की,



" ब्रह्मा विष्णुरहं देवि बध्दा:स्म कर्मणा सदा। कामाक्रोधादि भिर्देषैस्तस्मात्सर्वे अनिश्वरा:॥


[शिव पुराण ध. स. 49-7]


अर्थात,

"हम ब्रह्मा, विष्णु, और महेश स्वकर्मो से सदा बध्द हैँ, काम और क्रोध से युक्त देवतागण सृष्टी का व्यापार करने के लिये कार्यरत है, मोक्ष देना हमारे हाथ मेँ नहीँ, हम देवता हैँ परमेश्वर नहीँ हैँ।"


इससे बडा सबुत दुसरा कोइ भी नहीँ है।









न चास्य कश्र्चित् पतिरस्ति लोके ।


अर्थात... "परमेश्वरका कोइ ईश्वर नहीँ होँता"।


परंतु त्रिदेवोँका भी ईश्वर हैँ...


ब्रह्मविष्णुशिवादीनामीश्र्चर: प्रकृते: पर: ।


अर्थात... "ब्रह्मा, विष्णु, शिवादीँका भी ईश्वर हैँ, तथा वह प्रकृति अर्थात माया से भी पर हैँ"


[ब्रह्मवैवर्त पुराण - श्रीकृ.115.16]









"परमेश्वर भक्ती" और "देवता भक्ती" मेँ क्या हैँ अंतर ?