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स्वंय शिव कहते हैँ "सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैँ भगवान श्रीकृष्ण" ...





हे देवी पार्वती, इसीलीये वृंदावन में लीला कर रही बालकृष्ण मुर्ती मन मेँ स्मरण करो......





(पद्म पुराण के अनुसार, पाताळ खंड, वृंदावन महात्म्य प्रथम अध्याय)



पद्मपुराण मेँ महादेव देवी पार्वती को श्रीकृष्ण महत्त्व वर्णन बताते हुये कहते है की,


महादेव उवाच : पदंघ्री नख चंद्राशु महिमा नतोन गम्य:॥ तन्महात्म्यं कियद्देवी मोच्यते तं मुद्रा श्रृणु ॥1॥

अनंत कोटी ब्रह्माडे अनंत त्रिगुणोच्छये ॥ तत्कला कोटी कोट्याँशो ब्रह्माविष्णुमहेश्वर: ॥110॥

सृष्टि स्थित्यादिना युक्का तिष्ठत्नि तस्य वैभव:॥ तदृप कोटिकोट्यांशो कलाकंदर्पविग्रह:॥111॥

जगन्मोहं प्रकुर्वत्नि तदाण्डान्तरंसंस्थिता॥1/2॥ तदेह विलसत्कांत्नि कोटिकोट्यांशको विभु:॥ तत्प्रकाशस्थ कोट्यांशशो रस्मयोरारविग्रह:॥112॥

तस्य स्वदेहकिरणै: परानंदरसामृतै:॥ परमगामोदचिदृप निर्गुणस्यैक कारणम् ॥113॥

तदांश कोटिकोट्यांशो जीवन्ति किरणात्मका ॥ तदंघ्रिपंकज: द्वंद: नखचर्ममणिप्रभा ॥114॥

आहु: पूर्ण ब्रम्हणोपि कारणं वेद दुर्गमम् ॥ तदंश सोरभानंत कोट्यांशो विश्वमोहिनं ॥115॥

तत् स्पर्श पुष्य गंधादि नाना सौरभ संभव ॥ तत्प्रिया प्रकृतिस्त्वाद्दा राधिका कृष्णवल्लभ ॥116॥

तत्कला कोटिकोट्यांशो दुर्गाद्दा त्रिगुणात्मक:॥ तस्यांगि रज: स्पर्शन्ते कोटि विष्णु प्रजायते ॥117॥

गोविंद देहतो भिनं पुर्णब्रम्हसुखाश्रयं ॥ मुक्तिस्तत्र रज स्पर्शात् तन्महात्म्यं किमुच्यते ॥118॥

तस्मात्सर्वात्मना देवी ह्रदिस्थं तद्वनं कुरु ॥ वृन्दावनविहारेषु कृष्णुं कैशोरविग्रहम्॥119॥



अर्थात महादेव कहते है : जिसके चरणो के नखोँ मे अंनत च्रंद किरणोँका महिमांओँका अंत नहीँ, उसके माहात्म्य मैँ तुझको बताता हु ओ सुन, ॥1॥

अनंत कोटी ब्रम्हाण्ड मेँ त्रिगुणोँका अनंत समुह हैँ, उन कलाओँ के कोटी कोटी अंश मेँ ब्रम्हा विष्णु महेश है ॥110॥

वो सृष्टि के सृजन पालन और विनाश के पात्र रहकर प्रताप सहित है, ॥111॥

उनके कोटी कोटी कलाओँ मे कामरुप देवता रह कर जग मेँ जिवोँ को मोहित करते ह॥1/2॥

इस प्रकार प्रभु के देह की शोभायमान कांती है, उन प्रभु के तेज से सुर्य च्रंद और अग्नी को प्रकाश है ॥112॥

उनके देह के किरण परमानंद के अर्मृत से युक्त है और सच्चिदानंद निर्गुण के कारण हैँ ॥113॥

ये सभी कोटी कोटी देवता उस मुर्ती के नखरुपी चांदणीयो के तेज से प्रकाशीत हैँ ॥114॥

वेदोँको जानना कठीण है, और वेद जानने योग्य नहीँ, विश्व मोहीनी गोपाल कृष्ण के मुर्ती ने अपने अनंत अंशोमेँसे एक अंश से पुर्ण ब्रम्हाण्ड निर्माण किया है ॥115॥

उनके स्पर्श से उप्तन्न हुयी पुष्पो से भी अधिक सुगंधी योगमाया है, और राधा उनकी सखी है ॥116॥

उनके कालके करोडो अंशोमेँसे, एक अंश तिन्ही गुणों से युक्त दुर्गा आदी शक्ती है ॥117॥

उनके पदस्पर्श से अनेक विष्णु उप्पन होते है ॥118॥

हे देवी पार्वती, इसीलीये वृंदावन में लीला कर रही बालकृष्ण मुर्ती मन मेँ स्मरण करो ॥119॥



इस से ये प्रतित होता है की परब्रम्ह परमेश्वर भगवान श्रीकृष्णजी और ब्रम्हा विष्णु महेश मेँ समानता नहीँ हो सकती







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