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कच्छ, मत्स्य, वराह, नृसिँह, वामन, राम, परशुराम, बौध्द और कलंकी अवतारो ने किन साधु पुरुषों का उद्धार किया ?





देवता अवतार लेते हैँ दुसरे देवताओँके संकट निवारण के लिए; और परमेश्वर ज्ञान देकर जिवोँके उद्धार के लिए...





पुराणो के अनुसार 10 अवतार हुये है, उन मेँ से


मत्स्य अवतार ने शंखरासुर का वध किया,


कच्छ अवतार ने समुद्रमंथन के वक्त मंदराचल पर्वत पीठ पर लिया,


वराह अवतार ने हिरणाक्ष का और


नृसिँह अवतार ने हिराण्यकश्यपु का वध कीया,


वामन अवतार ने राक्षसो के राजा बली को पाताल मे ढकेल दिया,


परशुराम अवतार ने 21 बार नि:क्षत्रिय पृथ्वी कर डाली,


राम अवतार ने रावण जैसे राक्षको का वध किया,


तथा बुध्द अवतार ने कीसी को ज्ञान नहीँ दिया,


और रहा कलकीं जो क्लेशंद का वध करने के लिये आगे होणे वाला है!


अब आप ही बताईये की इन मेँ से किस अवतार ने जीवों को ज्ञान देकर उनका उध्दार किया इस के उलटा भगवान श्रीकृष्णजी ने गिता का अमृतमय ज्ञान दिया, भगवान ने कहां है,



यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत । अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्‌ ॥7॥


परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्‌ । धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥8॥ Download Ringtone


गिता अध्याय 4, श्लोक 7 और 8. Geeta Link


अर्थात... हे भारत ! जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब ही मैं अपने रूप को रचता हूँ अर्थात साकार रूप से लोगों के सम्मुख प्रकट होता हूँ; साधु पुरुषों का उद्धार करने के लिए, पाप कर्मो का विनाश करने के लिए और धर्म की अच्छी तरह से स्थापना करने के लिए मैं युग-युग में प्रकट हुआ करता हूँ ।



तथा भागवत मेँ भी कहा गया हैँ,


हेँ परीक्षित्‌ ! वास्तवमेँ भगवान्‌ प्रकृतिसम्बधी वृद्दि - विनाश, प्रमाण-प्रमेय और गुणगुणीभावसे रहित हैँ। वे अचिन्त्य अनन्त अप्राकृत परम कल्याणस्वरुप गुणोँके एकमात्र आश्रय हैँ । उन्होँने यह जो अपनेको तथा अपनी लीलाको प्रकट किया हैँ, उसका प्रयोजन केवल इतना ही हैँ कि जीव उसके सहारे अपना परम कल्याण सम्पादन करे...;


[श्रीमद्भागवत कथासार, दशम स्कन्द, अध्याय 29, श्लोक 14]


भगवान इस कथन से कुछ सवाल पैदा होते हैँ वह कुछ इस तरह की,


(1) जब कच्छ, मत्स्य, वराह, नृसिँह, वामन, राम, परशुराम, बौध्द और कलंकी अवतार हुये तब कौन से धर्म की हानि और कौन से अधर्म की वृद्धि हुयी थी ?


(2) कच्छ, मत्स्य, वराह, नृसिँह, वामन, राम, परशुराम, बौध्द और कलंकी अवतारो ने किन साधु पुरुषों का उद्धार किया ?


(3) कच्छ, मत्स्य, वराह, नृसिँह, वामन, राम, परशुराम, बौध्द और कलंकी अवतारो ने कौन से पाप कर्म करने वालों का विनाश किया ? सिर्फ देवताओ के रक्षण के लिये राक्षोका वध किया...

{श्रीराम ने अहिल्या का उद्दार नहीँ किया बल्की उसे शाप मुक्त किया तथा बाकी अवतारो ने राक्षस यौनी से जय विजय को शाप मुक्त किया... }


(4) कच्छ, मत्स्य, वराह, नृसिँह, वामन, राम, परशुराम, बौध्द और कलंकी अवतारो ने कौन से धर्म की स्थापना की ?


(5) तथा ये सभी अवतार एक ही युग मेँ बार बार हुये और भगवान श्रीकृष्ण तो युग युग अवतार लेने की बात करते हैँ। फिर ऐसा क्योँ ?



इससे ये साबित हो गया हैँ की देवता सिर्फ दुसरे देवताओँका संकट निवारणे के लिये तथा राक्षसो को मार कर उन्हो शाप मुक्त करने के लिए अवतार धारण करते हैँ...

और परमेश्वर जिवोँके उद्दार के लिए अवतार धारण करता हैँ...

अत: भगवान श्रीकृष्ण का बाकी 9 अवतारोँ से कुछ भी संबध नहीँ है,





पुराण प्रसिध्द 10 अवतार किस - किसने लिये ये जानने के यहां किल्क करे।





अथवा, भगवान श्रीकृष्णजी ने हर युग मेँ लिये हुये अवतार जानने के लिये यहां किल्क करे।