*

...देवताओं को पूजने वाले देवताओं को प्राप्त होते हैं, और हे अर्जुन मेरा पूजन करने वाले भक्त मुझको ही प्राप्त होते हैं ।





श्रीकृष्ण देवता भक्तो को कहते हैँ "अल्पबुद्दी"





भगवान श्रीकृष्णजी 7 वे अध्याय मेँ कहते है की,

कामैस्तैस्तैर्हृतज्ञानाः प्रपद्यन्तेऽन्यदेवताः । तं तं नियममास्थाय प्रकृत्या नियताः स्वया ॥


यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रद्धयार्चितुमिच्छति । तस्य तस्याचलां श्रद्धां तामेव विदधाम्यहम्‌ ॥


स तया श्रद्धया युक्तस्तस्याराधनमीहते । लभते च ततः कामान्मयैव विहितान्हि तान्‌ ॥


अन्तवत्तु फलं तेषां तद्भवत्यल्पमेधसाम्‌ । देवान्देवयजो यान्ति मद्भक्ता यान्ति मामपि ॥


गिता अध्याय 7, श्लोक 20 से 23

Geeta Link





अर्थात, हे अर्जुन! उन-उन भोगों की कामना द्वारा जिनका ज्ञान हरा जा चुका है, वे लोग अपने स्वभाव से प्रेरित होकर उस-उस नियम को धारण करके अन्य देवताओं को भजते हैं अर्थात पूजते हैं ॥7-20॥


जो-जो सकाम भक्त जिस-जिस देवता के स्वरूप को श्रद्धा से पूजना चाहता है, उस-उस भक्त की श्रद्धा को मैं उसी देवता के प्रति स्थिर करता हूँ ॥7-21॥


वह पुरुष उस श्रद्धा से युक्त होकर उस देवता का पूजन करता है और उस देवता से मेरे द्वारा ही विधान किए हुए उन इच्छित भोगों को निःसंदेह प्राप्त करता हैँ ॥7-22॥


परन्तु उन अल्प बुद्धिवालों का वह फल नाशवान है तथा वे देवताओं को पूजने वाले देवताओं को प्राप्त होते हैं और मेरे भक्त चाहे जैसे ही भजें, अन्त में वे मुझको ही प्राप्त होते हैं॥7-23॥





कामैस्तैस्तैर्हृतज्ञानाः प्रपद्यन्तेऽन्यदेवताः ।


अन्तवत्तु फलं तेषां तद्भवत्यल्पमेधसाम्‌ ।


[गिता 7-20,23]


तात्पर्य... "उस उस उस ऐहिक और पारलौकिक कामनाओँ सेँ जिनका विवेकज्ञान हरा जा चुका हैँ ऐसे अज्ञानी बने हुये लोग परमेश्वर को छोडकर दुसरे देवताओँ को शरण जाते हैँ"...

"उन देवताओँ को शरण जाने के कारण उनकी आराधना करने वाले मतिमंद देवता भक्तोँको मिलनेवाला फल नाशवान होँता हैँ"...


इस पर टिका करते हुये श्रीशकंराचार्य भी कहते हैँ


एव समानेऽप्यायासे मामेव न प्रपद्यन्तेऽनन्तफलायाहो खलु कष्टं वर्तन्त इत्यनुक्रोशं दर्शयति भगवान्‌।


अर्थात... "जिस प्रकार देवताओ की और परमेश्वरकी आराधाधा करने मेँ प्रयास एक जैसा रहा फिर भी, अन्तफल संपादन करने के लिये परमेश्वर को शरण नहीँ जाते, यह लोग परमेश्वर भक्त नहीँ बनते. अरे अरे! कितनी बुरी बात हैँ, (इस का कारण अज्ञान के सिवाय कुछ भी नहीँ हैँ)"


इन वचनोँ से यही प्रतित होता हैँ की, परमेश्वर तो देवताओँसे निराला हैँ और लोग देवताओँको हीँ परमेश्वर समझकर पुजते हैँ...













भगवान श्रीकृष्ण कहते हैँ "जो देवताओँको हीँ परमेश्वर समझकर पुजते हैँ वह लोग अज्ञानी और अल्पबुद्दी हैँ" जानिये अगले प्रमाण मेँ...







अगला प्रमाण अगले पेज पर...अगला पेज



Back Page



पेज :- 1 [2] 3 4 5