...तो फिर श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण एक ही कैसै हो सकते है ?





* प्रमाण पहीला *


यह सब तो आपको पता ही होगा की रामायण किसने लिखा हैँ ?


रामायण वाल्मीकी ऋषी ने लिखा है,

परन्तु कब लिखा है ?

श्रीराम जन्म के हजारो साल पहले वाल्मीकी ऋषी ने अपने तप सामर्थ से सब कुछ दिव्य दृष्टी से देख कर वाल्मीकी रामायण रच लिया था । और वह सब वाल्मीकी रामायण मे लिखा है।



परन्तु इधर भगवान श्रीकृष्ण क्या कहते है।



न मेँ विदू सुरगणा प्रभवं न महर्षय ।

अहमादिर्हि देवानां महर्षीणां च सर्वश ॥ गिता अध्याय 10, श्लोक 2. Geeta Link

अर्थात, "हे अर्जुन, मेरी उत्पत्ति को अर्थात लीलासे प्रकट होने को न देवता लोग जानते है और न महर्षिजन भी जानते है, क्योकी मै सब प्रकार से देवताओँका और महर्षिओँका भी आदी अंत और मध्य मै हूँ" ।



तो इससे यह प्रतीत होता है की भगवान श्रीकृष्ण के अवतार लेने को देवतागण और महान महान ऋषी भी नहीँ जान पाते तो श्रीराम जन्म के हजारो साल पहले वाल्मीकी जी ने रामायण कैसे लिख लिया । तो फिर श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण एक कैसै हो सकते है ?









तथा श्रीमदभागवत् मेँ भी परमेश्वर के अवतार के वर्ण दिये गये हैँ। वह इस प्रकार हैँ।



आसन्‌ वर्णास्रयो ह्यस्य गृण्हतोनुयुर्गनु॥ शुक्लो रक्तस्तथा पीत इदानीँ कृष्णतांगत: ॥॥ कृते शुक्लं हरिर्ज्ञेये त्रेतायां रक्तवर्णवान्‌ ॥ द्वापारं नीलवर्ण च पीँतवर्ण कलौ युगे ॥2॥

भगवान श्रीकृष्ण के नामकरण विधी के वक्त मेँ गर्गाचार्यजीने कहा " यह जो साँवला - साँवला हैँ. यह प्रत्येक युग मेँ शरीर ग्रहण करता हैँ। पिछले युगोँमेँ इसने क्रमश: श्वेत, आरक्त और पित - ये विभिन्न रंग स्वीकार किये थे । अबकी यह कृष्णवर्ण हुआ हैँ। इसलिये इसका नाम 'कृष्ण' होगा " ॥13॥

श्रीमदभागवत कथासार, दशम स्कन्ध (पुर्वार्ध) अध्याय 8, श्लोक 13.



इसके अनुसार परमेश्वर जो युग - युग अवतार लेता हैँ, वो इस प्रकार हैँ।

कृत युग - श्वेत वर्ण

त्रेता युग - आरक्त वर्ण

द्वापार युग - कृष्ण या निल वर्ण

कली युग - पित वर्ण



तो फिर त्रेता युग लिये हुये अवतार का वर्ण (रंग) तो आरक्त होना चाहिये, परंतु श्रीराम का रंग तो साँवला ही हैं, इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण के युग - युग मे लिये हुये अवतारो मेँ श्रीराम को रखना उचित नहीँ, बल्की त्रेता युग मेँ परमेश्वर अवतार जो हुआ हैँ उनका रंग तो आरक्त ही हैँ। जो स्वंय भगवान श्रीदत्तात्रेय हैँ। पर उन्हे भी लोगोँ ने हरीहरब्रम्हा का अवतार समझ लिया हैँ । पुरा सच जिनिये...... यहां किल्क करके ...











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